अमेरिका की नई दिशा: वेनेज़ुएला पर हमला, इराक से सैनिक बाहर, और सैन डिएगो बॉर्डर पर मिलिट्री बिल्डअप
आज की तारीख: 23 जनवरी 2026
पिछले कुछ हफ्तों में संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपनी सैन्य रणनीति में बड़े बदलाव किए हैं। ये तीन मुख्य घटनाएं एक तरफ लैटिन अमेरिका और दक्षिणी बॉर्डर पर आक्रामक फोकस दिखा रही हैं, और दूसरी तरफ मध्य पूर्व से आंशिक पीछे हट रही हैं।
1. अमेरिका ने वेनेज़ुएला पर हमला किया
3 जनवरी 2026 को अमेरिका ने वेनेज़ुएला में "ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व" नाम का एक विशेष सैन्य अभियान शुरू किया। इसमें अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने काराकास में राष्ट्रपति निकोलास मदुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़ लिया। उन्हें न्यूयॉर्क ले जाकर नारको-टेररिज्म, ड्रग तस्करी और हथियारों के आरोपों में अदालत में पेश किया गया।
अभियान के दौरान लक्षित एयर स्ट्राइक्स, साइबर अटैक और बॉम्बिंग की गईं। मौतों का अनुमान 75-100 के बीच है। यह एक सर्जिकल स्ट्राइक थी, पूर्ण आक्रमण नहीं। ट्रंप प्रशासन ने इसे "कानून प्रवर्तन" कार्रवाई बताया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन कहा।
2. अमेरिका ने इराक से अपने सैनिकों को बाहर कर लिया
जनवरी 2026 में इराक ने घोषणा की कि अमेरिका-नेतृत्व वाली गठबंधन सेनाएं फेडरल इराक से पूरी तरह वापस ले ली गई हैं। अल-असद एयर बेस से अंतिम अमेरिकी सैनिक निकल गए हैं। कुर्दिस्तान क्षेत्र में कुछ सैनिक अभी भी मौजूद हैं।
यह 2024 के समझौते का हिस्सा था और मध्य पूर्व से अमेरिका के आंशिक पीछे हटने को दिखाता है।
3. अमेरिका सैन डिएगो पर हथियार और सैनिक भेज रहा है
दक्षिणी बॉर्डर पर मिलिट्री बिल्डअप जारी है। दिसंबर 2025 में 760 एकड़ भूमि को मिलिटराइज्ड जोन बनाया गया। हजारों सैनिक, हेलीकॉप्टर, ड्रोन तैनात किए गए हैं।
ट्रंप प्रशासन इसे "आक्रमण" रोकने के लिए कर रही है, लेकिन आलोचक इसे घरेलू मिलिट्री उपयोग का उल्लंघन मानते हैं।
ये तीनों घटनाएं क्या दर्शाती हैं?
ये कार्रवाइयां ये दर्शाती हैं कि अमेरिका इस बार ईरान पर हमला पूरी ताकत से करने की कोशिश करेगा। इसलिए अमेरिका ने उन समस्याओं का समाधान पहले ही निकाल लिया जो अमेरिका के लिए रुकावट और ईरान के लिए ताकत बनती थी।
1. अमेरिका ने पहले ही वेनेजुएला पर अटैक करके वहां का तेल अपने कब्जे में ले लिया है। क्योंकि ईरान पर हमला होते ही तेल का व्यापार पूरी तरह से बंद हो जाएगा। जिसकी वजह से अमेरिका को भी युद्ध के दौरान तेल की कमी का सामना करना पड़ सकता था। लेकिन अब वेनेज़ुएला का तेल उसके पास है जिससे उसे तेल की कमी नही होगी।
2. अमेरिका ने अपने सैनिकों को इराक़ से बाहर इसलिए निकाला क्योंकि पिछली बार ईरान ने इराक में स्थित अमेरिका के एयरबेस को निशाना बनाया था। ईरान के उस हमले में अमेरिका के 250 से ज्यादा सैनिक मारे गए थे और 700 से ज्यादा घायल थे।
3. अमेरिका सैन डियागो पर हथियार और सैनिक दोनों भेज रहा है। और जिन सैनिकों को इराक से निकाला गया उन्हें भी सैन डियागो एयरबेस पर भेज दिया गया। क्योंकि सैन डियागो एयरबेस से ईरान की दूरी 4000 किलो मीटर है। ईरान पर हमला करना और ईरान के हमले से अपनी सुरक्षा करना अमेरिका के सैनिकों को आसान होगा और खतरा कम होगा। ऐसा अमेरिका के एक्सपर्ट्स को लगता है ।
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