ईरान और अमेरिका के बीच के संबंध 2025 में भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह अली खामेनेई ने साफ कहा है कि जब तक अमेरिका इज़राइल का समर्थन करता रहेगा, मध्य पूर्व में दखलंदाजी करता रहेगा और अपने सैन्य ठिकानों को वहां बनाए रखेगा, तब तक ईरान अमेरिका के साथ दोस्ती या सहयोग की स्थिति में नहीं आएगा। खामेनेई के अनुसार, अमेरिका को सबसे पहले इज़राइल का साथ छोड़ना होगा तभी किसी भी तरह की दोस्ती या सहयोग संभव है।
दूसरी ओर, अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह सीमित करे, खासकर यूरेनियम संवर्धन पर रोक लगाये ताकि परमाणु हथियार बनाने के संदेह को समाप्त किया जा सके। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और उसका कानूनी अधिकार है। साल 2025 में दोनों देशों के बीच कई चरणों में अप्रत्यक्ष वार्ताएं भी हुईं, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो पाया है।
ईरान के पूर्व वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी ने कहा है कि ईरान दो हफ्तों में परमाणु बम बना सकता है, लेकिन उसने परमाणु हथियारों के खिलाफ धार्मिक फतवे की वजह से अभी तक ऐसा नहीं किया है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ सहयोग और दोस्ती की पेशकश की है, लेकिन कड़ा रुख रखते हुए कहा है कि ईरान को पहले शांति और सहयोग के लिए तैयार होना होगा।
इस पूरे स्थिति से साफ है कि ईरान-अमेरिका संबंधों में फिलहाल बहुत गहरा संदेह और असहमति है, जिसमें मध्य पूर्व की राजनीति, इज़राइल का समर्थन, परमाणु कार्यक्रम और सैन्य उपस्थिति मुख्य मुद्दे हैं। इन परिस्थितियों के कारण इस समय दोनों देशों के बीच संतुलित और स्थायी दोस्ती या सहयोग की उम्मीद कम नजर आती है।
यह स्थिति विश्व और क्षेत्रीय राजनीति के लिए तनाव की स्थिति बनाए हुए है, जिससे आर्थिक, सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर असर पड़ रहा है।
यहां इस लेख में ईरान-अमेरिका के वर्तमान तनावपूर्ण संबंधों का सार प्रस्तुत किया गया है।
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